नई दिल्ली: YouTuber और सोशल मीडिया कमेंटेटर अजीत भारती (Ajeet Bharti) को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने नागिना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित जातिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में भारती की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने प्रथम दृष्टया माना कि मामले में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की संबंधित धाराएं लागू होती हैं।
क्या है पूरा मामला?
अजीत भारती के खिलाफ दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में 23 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की गई थी। FIR में SC/ST Act के अलावा Information Technology Act की धारा 67 और Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धाराएं 196(1)(c) और 351(3) भी लगाई गई हैं। शिकायत एक सोशल मीडिया वीडियो को लेकर दर्ज की गई थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वीडियो में चंद्रशेखर आजाद और डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। शिकायत में जाति आधारित कथित अपमानजनक भाषा, महिलाओं के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने मामले की सुनवाई के दौरान वीडियो और उसकी ट्रांसक्रिप्ट का भी परीक्षण किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि भारती की टिप्पणियों में जाति की पहचान और जातिगत श्रेष्ठता के विचारों का बार-बार उल्लेख किया गया था। कोर्ट के अनुसार, टिप्पणियां केवल सामान्य या आकस्मिक बयान नहीं थीं।
अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो को “public view” में माना जा सकता है। कोर्ट ने इंटरनेट की व्यापक पहुंच को देखते हुए कहा कि इसके लिए पीड़ित व्यक्ति का वीडियो के समय भौतिक रूप से मौजूद होना जरूरी नहीं है।
SC/ST Act की किन धाराओं का मामला?
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया SC/ST Act की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत मामला बनता हुआ माना। इन प्रावधानों के संबंध में अदालत ने कहा कि मामले में कानून के तहत अग्रिम जमानत पर वैधानिक रोक लागू होती है। इसी आधार पर भारती की अग्रिम जमानत याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना गया और उसे खारिज कर दिया गया।
अजीत भारती की ओर से क्या दलील दी गई?
भारती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने दलील दी कि उनके मुवक्किल जातिगत भेदभाव के समर्थक नहीं हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि वीडियो में कही गई बातें आरक्षण को लेकर उनकी राय से जुड़ी थीं और उन्होंने चंद्रशेखर आजाद को उनकी जाति के कारण निशाना नहीं बनाया।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि भारती की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर उनकी बहन के खिलाफ की गई कथित टिप्पणियों के जवाब में थी। उनके वकील ने तर्क दिया कि भारती के बयान के पीछे जातिगत भेदभाव की मंशा नहीं थी।
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने भारती की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया। पुलिस का कहना था कि उनके बयान में एक विशेष जाति को अपमानित किया गया और समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाया गया। पुलिस ने अदालत के समक्ष भारती के पूर्व बयानों से जुड़े दावे भी रखे।
पहले ट्रायल कोर्ट ने भी खारिज की थी जमानत
अजीत भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख पटियाला हाउस कोर्ट के 7 सितंबर 2026 के आदेश के खिलाफ किया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर ने उस समय उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद भारती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
आगे क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत से इनकार किए जाने का अर्थ यह है कि इस मामले में भारती को pre-arrest protection नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने मामले में प्रथम दृष्टया SC/ST Act की धाराओं को लागू माना है। हालांकि, यह आदेश मामले के अंतिम दोष या निर्दोषता का निर्धारण नहीं करता; मुकदमे में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर आगे न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।













