फिल्म- द वन (The Vvaan)
डायरेक्टर- दीपक कुमार मिश्रा
एक्टर्स- सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, अनूप सोनी, श्वेता तिवारी, सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल
रेटिंग- 2 स्टार
The Vvaan Movie Review: TVF ने ‘Permanent Roommates’, ‘Pitchers’, ‘Panchayat’, ‘Aspirants’, ‘Kota Factory’, ‘Gullak’ और ‘Gram Chikitsalay’ जैसी वेब सीरीज के जरिए कहानी कहने की अपनी अलग पहचान बनाई है। यही वजह है कि जब TVF की टीम पहली बार फिल्म लेकर आई, तो दर्शकों की उम्मीदें भी काफी ज्यादा थीं। लेकिन ‘The One’ देखने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है—आखिर यह फिल्म बनाई क्यों गई?
फिल्म देखने के दौरान कई जगह ऐसा महसूस होता है कि जिस TVF से दर्शक मजबूत कहानी, शानदार किरदार और सहज भावनात्मक जुड़ाव की उम्मीद करते हैं, वही चीजें इस फिल्म में कमजोर पड़ जाती हैं।
TVF की पुरानी पहचान और ‘The Vvaan’ की निराशा
TVF की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उसकी कहानी रही है। ‘Panchayat’ में गांव की दुनिया हो, ‘Aspirants’ में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की कहानी या ‘Gullak’ में एक आम भारतीय परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी—इन कहानियों में दर्शकों को अपनी जिंदगी और अपने आसपास की दुनिया नजर आती रही है।
लेकिन ‘The Vvaan’ में यह जुड़ाव काफी कमजोर दिखाई देता है। फिल्म की कहानी कई जगह सतही लगती है और स्क्रीन पर घटनाएं आगे बढ़ती रहती हैं, लेकिन दर्शक के भीतर वह भावनात्मक कनेक्शन पैदा नहीं हो पाता, जो TVF की पहचान रहा है।
फिल्म देखने के बाद सवाल सिर्फ यह नहीं रहता कि कहानी कमजोर क्यों थी, बल्कि यह भी लगता है कि TVF जैसी टीम से ऐसी फिल्म की उम्मीद आखिर क्यों नहीं की गई थी।
ओवरकॉन्फिडेंस ने किया बेड़ा गर्क?
The Vvaan’ को देखते हुए सबसे ज्यादा जो चीज परेशान करती है, वह है कहानी को लेकर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास। ऐसा लगता है कि मेकर्स को अपनी कहानी कहने की क्षमता पर इतना भरोसा था कि उन्हें लगा कि दर्शक हर चीज आसानी से स्वीकार कर लेगा।
लेकिन फिल्म में कई ऐसे हिस्से हैं, जहां दर्शक की विश्वसनीयता और धैर्य दोनों की परीक्षा होती है।
सस्पेंस और सुपरनैचुरल एलिमेंट्स कहानी का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें स्थापित करने के लिए कहानी के बेसिक लॉजिक और टाइमलाइन का ध्यान रखना भी जरूरी है। ‘The Vvaan’ में यही संतुलन कई जगह बिगड़ता नजर आता है।
फिल्म का एक अहम हिस्सा छठ पर्व से जुड़ा है। ऐसे में फिल्म में छठ की पृष्ठभूमि और उससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर स्वाभाविक रूप से दर्शकों की नजर भी जाती है।
यहीं फिल्म की टाइमलाइन सवाल खड़े करती है। फिल्म में छठ के दौरान पूर्णिमा की रात को जिस तरह दिखाया गया है, वह कहानी की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। लगातार तीन दिनों तक पूर्णिमा की रात का चित्रण फिल्म के इस हिस्से को और ज्यादा असहज बना देता है।
खासकर जब कहानी का संबंध पूर्वांचल और छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्व से हो, तो दर्शक इन बारीकियों पर ज्यादा ध्यान देता है।
दीपक कुमार मिश्रा से थी ज्यादा उम्मीद
‘The Vvaan’ के निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा TVF की चर्चित सीरीज ‘Panchayat’ से भी जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि उनके निर्देशन में बनी फिल्म से उम्मीदें स्वाभाविक रूप से ज्यादा थीं।
दीपक कुमार मिश्रा का पूर्वांचल से जुड़ाव भी इस फिल्म के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाता है। छठ और पूर्वांचल की संस्कृति को कहानी में शामिल करते समय स्थानीय भावनाओं, परंपराओं और माहौल की बारीकियों को लेकर ज्यादा सावधानी की उम्मीद की जाती है।
लेकिन फिल्म में कुछ ऐसे फैसले दिखाई देते हैं, जो इस उम्मीद पर सवाल खड़े करते हैं।
सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की जोड़ी
फिल्म की एक और बड़ी कमजोरी इसकी लीड पेयरिंग है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया जैसे कलाकारों को एक साथ देखने की उम्मीद तो थी, लेकिन फिल्म में दोनों के बीच वह केमिस्ट्री और भावनात्मक जुड़ाव नजर नहीं आता, जिसकी कहानी को जरूरत थी।
समस्या सिर्फ दोनों कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री तक सीमित नहीं है। कई जगह ऐसा लगता है कि उनके किरदार कहानी के साथ भी पूरी तरह घुल नहीं पाए हैं।
एक मजबूत कहानी में मुख्य किरदारों का आपस में जुड़ना, कहानी की दुनिया से उनका कनेक्शन और बाकी पात्रों के साथ उनकी केमिस्ट्री बेहद महत्वपूर्ण होती है। ‘The Vvaan’ में यही कनेक्शन कमजोर दिखाई देता है।
क्या सिर्फ छठ की पृष्ठभूमि काफी है?
फिल्म में छठ को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। लेकिन किसी बड़े और भावनात्मक पर्व को फिल्म में शामिल कर देना अपने आप में कहानी को मजबूत नहीं बनाता।
छठ सिर्फ एक विजुअल बैकड्रॉप नहीं है। इसके साथ करोड़ों लोगों की आस्था और भावनाएं जुड़ी हैं। ऐसे में अगर फिल्म इस पर्व को कहानी का आधार बनाती है, तो दर्शक उससे एक विश्वसनीय और संवेदनशील प्रस्तुति की उम्मीद करता है।
‘The Vvaan’ में यह भावनात्मक गहराई उस स्तर तक नहीं पहुंच पाती, जिसकी उम्मीद TVF से की जाती है।
TVF टीम की पहली फिल्म और बड़ी चूक
TVF ने OTT पर अपनी मजबूत पहचान बनाने में वर्षों लगाए हैं। उनकी कहानियों की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वे छोटे और साधारण विषयों में भी भावनाएं और मनोरंजन तलाश लेते हैं।
इसीलिए ‘The One’ की सबसे बड़ी निराशा यही है कि फिल्म को लेकर उम्मीदें TVF की पिछली फिल्मों या सीरीज की वजह से काफी ज्यादा थीं।
फिल्म के पास एक अलग माहौल, बड़े कलाकार और एक ऐसा विषय था, जिसे भावनात्मक तरीके से पेश किया जा सकता था। लेकिन कहानी, स्क्रीनप्ले, टाइमलाइन और किरदारों के बीच कमजोर जुड़ाव की वजह से यह मौका पूरी तरह इस्तेमाल होता नजर नहीं आता।











