Nithari Case Surendra Koli Suicide: बहुचर्चित निठारी कांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह पिछले कुछ दिनों से इसी इलाके में चाय की दुकान चला रहा था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
हरिद्वार में चाय की दुकान चला रहा था सुरेंद्र कोली
जानकारी के मुताबिक, सुरेंद्र कोली हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में रह रहा था और पिछले कुछ दिनों से चाय की दुकान चला रहा था। शुक्रवार को उसकी चाय की दुकान के अंदर शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, शव सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित चाय के खोखे में मिला। स्थानीय पुलिस ने उसके परिजनों को घटना की सूचना दी है।
निठारी कांड से क्या था सुरेंद्र कोली का संबंध?
रेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 के निठारी कांड के बाद सामने आया था। नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी में कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामले ने दिसंबर 2006 में उस समय बड़ा रूप लिया, जब एक घर के पास से मानव अवशेष बरामद किए गए।
कोली उस समय डी-5, सेक्टर-31, नोएडा स्थित मकान में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। यह मकान मोनिंदर सिंह पंढेर का था। निठारी से जुड़े कई मामलों में कोली और पंढेर पर मुकदमे चले थे।
कई मामलों में हुई थी सजा
निठारी कांड से जुड़े अलग-अलग मामलों में सुरेंद्र कोली को निचली अदालतों ने दोषी ठहराया था और कुछ मामलों में उसे मृत्युदंड भी सुनाया गया था। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में इन मामलों की स्थिति बदलती गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में निठारी से जुड़े कई मामलों में कोली को बरी किया, जिसके बाद राज्य की ओर से की गई अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में भी उन बरी किए जाने के फैसलों को बरकरार रखा।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी किया था बरी
सुरेंद्र कोली के खिलाफ निठारी कांड से जुड़ा आखिरी लंबित मामला भी नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उसकी पिछली दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया था।
तीन जजों की पीठ ने उसे IPC की धारा 302, 364, 376 और 201 के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि गंभीर अपराध होने के बावजूद किसी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता और आपराधिक मामले में दोष साबित करने के लिए विश्वसनीय और स्वीकार्य सबूत जरूरी हैं।
बरी होने के करीब एक साल बाद हरिद्वार में मौत
सुरेंद्र कोली की मौत सुप्रीम कोर्ट से अंतिम निठारी मामले में बरी होने के करीब 10 महीने बाद हुई है। 2025 में अदालत के फैसले के बाद उसके खिलाफ निठारी कांड से जुड़े सभी आपराधिक मामलों का अंत हो गया था।
फिलहाल पुलिस उसकी मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। आत्महत्या के पीछे क्या कारण था, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग संभावनाओं का उल्लेख किया गया है, लेकिन पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी कारण को निश्चित तौर पर बताना उचित नहीं होगा।




