ढाका: बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने और बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीरें हटाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट यूनियन (DUCSU) के म्यूजियम से जुड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, DUCSU म्यूजियम में पहले शेख मुजीबुर रहमान से जुड़ी कई तस्वीरें प्रदर्शित थीं। इनमें 1952 के भाषा आंदोलन, 1954 के यूनाइटेड फ्रंट चुनाव, 1966 के छह सूत्रीय आंदोलन, 1969 के जनविद्रोह, 1970 के आम चुनाव और 7 मार्च 1971 के ऐतिहासिक भाषण से जुड़ी तस्वीरें शामिल थीं। अब इनकी जगह मुहम्मद अली जिन्ना की कम से कम तीन तस्वीरें दिखाई जा रही हैं।
जिन्ना की कौन-कौन सी तस्वीरें लगाई गईं?
रिपोर्ट के अनुसार, म्यूजियम में लगी जिन्ना की तस्वीरों में 1940 के लाहौर में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग सम्मेलन, 21 मार्च 1948 को ढाका में उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राजकीय भाषा बनाए जाने से जुड़े भाषण और 1970 के चुनाव से संबंधित एक तस्वीर शामिल है।
DUCSU की अधिकारी फातिमा तस्नीम जुमा के हवाले से कहा गया है कि 5 अगस्त 2024 के बाद “फासीवाद के प्रतीक” माने जाने वाले लोगों की तस्वीरें हटाई गईं। उनके मुताबिक, जिन्ना की तस्वीरें ऐतिहासिक घटनाओं को दर्ज करने के उद्देश्य से लगाई गई हैं, उनका महिमामंडन करने के लिए नहीं।
तस्वीरों को लेकर छात्रों में विरोध
ढाका यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने का कुछ छात्रों ने विरोध भी किया। रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को एक छात्र ने म्यूजियम में लगी जिन्ना की तीन तस्वीरें फाड़ दीं। छात्र ने आरोप लगाया कि जिन्ना ने बंगाली भाषा का विरोध किया था और ऐसे में उनकी तस्वीरों के लिए DUCSU म्यूजियम में जगह नहीं होनी चाहिए। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की छात्र शाखा ने भी जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने की निंदा की है।
बांग्लादेश की राजनीति में बदल रही तस्वीर
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में मुजीबुर रहमान की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और अंतरिम सरकार के दौरान राष्ट्रपति कार्यालय से उनकी तस्वीर हटाने तथा मुद्रा नोटों से उनकी तस्वीर हटाने की दिशा में भी कदम उठाए गए।
ढाका यूनिवर्सिटी के म्यूजियम में शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीरों की जगह मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि बांग्लादेश में इतिहास और राष्ट्रीय विरासत की प्रस्तुति किस दिशा में बदल रही है।
